ગરવી ગુજરાત

ગરવી ગુજરાત ડોટ કોમ એ અમો એ ગુજરાતી ભાષાના ચાહકો માટે ખોલેલું નવા જમાનાનું નવા પ્રકારનું પરબ છે.
આ પરબમાં તમે ભલે પધાર્યા! તમારું સ્વાગત છે. આ પરબમાં તમને જે ગમે તે, મન થાય ત્યારે માણતા રહેજો અને બીજાને ખુશી ખુશી આપતા રહેજો.

' आक्रमण के हथियार बदल गये हैं '- भाग २

' आक्रमण के हथियार बदल गये हैं '- भाग २
हथियार बदल गए हैंयह घटना एक परिचित के साथ घटी थी,उन्होंने बाद में सुनाया था।जब गृह प्रवेश के वक्त मित्रों ने नए घर की ख़ुशी में उपहार भेंट किए थे।अगली सुबह जब उन्हेंने उपहारों को खोलना शुरू किया तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था!एक दो उपहारों को छोड़कर बाकी सभी में लाफिंग बुद्धा, फेंगशुई पिरामिड, चाइनीज़ ड्रेगन, कछुआ, चाइनीस फेंगसुई सिक्के, तीन टांगो...
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एक जमाने में जब भारत में सनीमा नही था तब कहानियों और किस्सों पर नौटंकियां बनती थी

यह संजय भंसाली क्या पिटा की सारे तथाकथित सेक्युलर, बुद्धजीवी, कलाकार और फ़िल्मी जमात 'सृजनात्मकता का अधिकार', सिनेमेटिक क्रिएटिविटी का झंडा बुलन्द किये कूद पड़े है। उन्हें इतिहासिक चरित्रों को, तोड़ मोड़ कर गाने अफसानो से थाली पर सजा कर जनता को पेश करने की आज़ादी चाहिए है। उन्हें हिंदुत्व के प्रतीकों से छेड़ खानी करने का अधिकार चाहिए है। इन भारत की संस्क...
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'अल्टरनेट व्यू' पर थप्पड़ नहीं लगता साहब, 'डबल स्टैंडर्ड' पर लगता है !

'अल्टरनेट व्यू' पर थप्पड़ नहीं लगता साहब, 'डबल स्टैंडर्ड' पर लगता है !
ध्यान से पढे़ । और अधिक से अधिक शेयर करें। 👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇 'अल्टरनेट व्यू' पर थप्पड़ नहीं लगता साहब, 'डबल स्टैंडर्ड' पर लगता है ! कहते हैं सिनेमा समाज का आईना होता है, ठीक वैसे ही जैसे साहित्य समाज का आइना होता है. फिर ये आइना अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की छूट कैसे दे देता है ? "...यहां प्रताप का वतन पला है आज़ादी...
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क्या हिन्दू समाज संजय लीला भंसाली के सेक्युलर हृदय को भय से भरेगा ?

दुष्ट सेक्युलर भाड़ निर्देशिका द्वारा इतिहास को विकृत कर जोधा अकबर नाटक बनाये जाने के बाद अब दूसरे एक और सेक्युलर संजय लीला भंसाली द्वारा मुस्लिम आक्रान्ता अल्लाउदीन खिलजी पर फ़िल्म बनाने की घोषणा की गई है। इस फ़िल्म में भंसाली आक्रान्ता खिलजी द्वारा रानी पद्मावती पर बुरी नियत रखने वाले खिलजी को अथाह प्रेमी के रूप में दिखाने की योजना है। यह प्रयास न ...
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फ़ौज के लिए ये अच्छे लक्षण नहीं

फ़ौज के लिए ये अच्छे लक्षण नहीं
मुझे अपने बचपन का वो किस्सा याद आता है जब 1971 की लड़ाई अभी बस ख़त्म ही हुई थी ।पिता जी की regiment कश्मीर के छम्ब ज्योड़ियां sector में posted थी । जम्मू से आगे अखनूर जिले में छम्ब और ज्योड़ियां नामक दो गाँव हैं जो पकिस्तान सीमा से लगते हैं । बताया जाता है कि 1971 में इस छम्ब sector में भीषण युद्ध हुआ था ।जिस समय युद्ध चल रहा था , हम लोग मने परिवार पठ...
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અમુક તમુક આલેખો

પ્રકરણ – 34 જગદંબાની ગુફામાં મંત્રણાભુલો અને જગ્ગો જગદંબાના ચીત્રની સામે ઉભા હતા. તેમની સાથે તેમના બધા સાથીદારો પણ હતા. મંદીર કચરાથી ભરેલું હતું. દેખીતી રીતે તેની સારસંભાળ બરાબર રખાતી ન હતી.ભુલો ...
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પ્રકરણ – 31 જોગમાયાની ગુફામાંદર વરસની જેમ જોગમાયાની ગુફામાં બધા નેસડાના પ્રતીનીધીઓ ભેગા થયા હતા. વરસે એક વખત આમ ભેગા થવાનો રીવાજ હજુ પળાઈ રહ્યો હતો. જોગમાયાની આરાધના શરુ થવાની તૈયારીઓ ચાલતી હતી. ...
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પ્રકરણ -1 : પહેલો નાવીકઈ.સ. પુર્વે 10,000 વર્શ ….આખું ગામ નદીકીનારે ભેગું થયું હતું. દર વરસે નદીમાં પુર આવે ત્યારે આમ જ બધા નદીકીનારે દોડી જતાં હતાં. બન્ને કાંઠે વહેતી નદીને જોવાનો લાભ કોણ જતું ક...
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માનો ગરબો રે, રમે રાજને દરબાર​
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પ્રકરણ – 16 : નેસડાનીએ મુલાકાતેનદીની પેલે પાર રહેનારા પોતપોતાને થાનકે જતાં પહેલાં ગોવાના નેસડે રોકાયા. સૌને માટે આ સાવ અવનવી રહેવાની રીત રહી. પેઢીઓથી મુક્ત ચરતાં પ્રાણીઓનો પીછો કરી, તેમમે ઝબ્બે ક...
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